टैक्स सिस्टम में ऐसा क्या बदलने वाला है कि नया कानून ला रही सरकार, सीतारमण ने की घोषणा

Updated on 01-02-2025 04:16 PM
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फाइनेंशियल ईयर 2025-26 का बजट पेश कर रही हैं। उन्होंने टैक्स रिजीम में बड़ा बदलाव होने वाला है। वित्त मंत्री ने अगले सप्ताह संसद में नया टैक्स विधेयक पेश करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए एक दशक से टैक्स रिफॉर्म्स लागू करने में लगी है। इनमें फेसलेस एसेसमेंट, टैक्सपेयर चार्टर और रिटर्न का तेजी से प्रोसेसिंग शामिल है। लेकिन सरकार ने ऐसे समय में एक कड़ा संदेश देने का फैसला किया है जब उसे जटिल कर कानूनों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक नए इनकम टैक्स कानून में प्रावधानों को सरल बनाने, अनावश्यक प्रावधानों को हटाने और भाषा को आम आदमी के लिए अधिक अनुकूल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने अधिकारियों की एक समिति बनाई थी जो यह तय कर रही है कि 63 साल पुराने आयकर अधिनियम की जगह नया कानून कैसे लाया जाए। मसौदा कानून को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया जाएगा। सरकार इस बारे में एक विधेयक पेश करेगी जिसे बाद में टैक्सपेयर्स और एक्सपर्ट्स से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर संशोधित किया जा सकता है।

क्या होगा नए कानून में

वित्त मंत्रालय और पीएमओ के अधिकारियों ने पिछले छह-आठ हफ्तों में पैनल के साथ मिलकर काम किया ताकि बजट पेश होने तक यह तैयार हो जाए। सीतारमण ने जुलाई के बजट में इसकी घोषणा की थी। 2010 में संसद में प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक पेश किए जाने के बाद से आयकर अधिनियम को नए सिरे से परिभाषित करने का यह कम से कम तीसरा प्रयास है।
मोदी सरकार ने विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया था, जिनकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और सिफारिशों को बड़े पैमाने पर स्वीकार नहीं किया गया। समिति को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पुराने कानून से हजारों प्रावधानों को नए कानून में हटा दिया जाए। इस कानून में कई ऐसी धाराएं हैं जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में आयकर अधिनियम से हटा दिए जाने के कारण अनावश्यक बना दिया गया है।

अधिकारियों का क्या है डर

एक सूत्र ने कहा कि आम आदमी के लिए भाषा को समझना मुश्किल हो सकता है और समिति को इसे यथासंभव सरल बनाने के लिए कहा गया है। लेकिन, सरकार प्रस्तावित कानून में नए मुद्दों को शामिल नहीं कर रही है, कम से कम फिलहाल तो नहीं। हालांकि अधिकारियों ने आगाह किया कि भाषा में बदलाव मुकदमेबाजी का कारण बन सकता है। इसकी वजह यह है कि टैक्सपेयर्स कई मामलों में नई व्याख्या चाहेंगे।

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