ट्रेन, फ्लाइट नहीं 'हाइपरलूप' से मिनटों में पूरा होगा घंटे भर का सफर

Updated on 20-11-2022 03:54 PM
नई दिल्ली: जरा सोचिए कि कैसा होगा जब आप दिल्ली से चंडीगढ़ का सफर आधे घंटे में पूरा कर लेंगे या फिर दिल्ली से मुंबई एक घंटे में पहुंच जाएंगे। आप सोच रहे होंगे कि ये तो सपना है, लेकिन आपको बता दें कि ये सपना जल्द हकीकत में बदलने वाला है। एक तरफ जहां देश में लोग बुलेट ट्रेन ( Bullet Train) का इंतजार कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर कई विदेशी कंपनियां भारत में तेज रफ्तार हाइपरलूप ( Hyperloop) के संचालन को लेकर रुचि दिखा रही हैं।

नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी दी कि कई विदेशी कंपनियां भारत में अल्ट्रा हाई स्पीड के लिए हाइपरलूप तकनीक लाने में रुचि दिखा रही हैं। हालांकि चर्चा अभी शुरुआती दौर में ही है। वीके सारस्वत भारत में हाइपरलूप की तकनीकी और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल का पता लगाने के लिए चयनित समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि कुछ विदेशी कंपनियां , जो पहले से ही अन्य देशों में हाइपरलूप तकनीक को विकसित कर रही हैं, भारत में इस तकनीक को लाने के लिए काम करना चाहती है।
25 मिनट में पहुंच जाएंगे मुंबई से पुणे
स्पेसएक्स, टेस्ला जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क ( Elon Musk) ने सबसे पहले हाइपरलूप तकनीक की चर्चा शुरू की थी । मस्क का ये ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। भारत में भी इसे लेकर उत्सुकता है। महाराष्ट्र सरकार ने तो मुंबई से पुणे के बीच हाइपरलूप तकनीक के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। अगर भारत में ये तकनीक सफल होती है तो मुंबई से पुणे का सफऱ जो अभी 3 से 4 घंटे में पूरा होता है उसे मात्र 25 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।


क्या है हाइपरलूप
हाइपरलूप एक हाई-स्पीड ट्रेन है, जो एक ट्यूब में चलती है। इस तकनीक की टेस्टिंग सबसे पहले अमेरिका के लास वेगास में नवंबर 2020 में की गई थी। वर्जिन हाइपरलूप ने लास वेगास में 500 मीटर के ट्रैक पर पॉड के साथ 161 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से टेस्ट रन किया था। यह हाई स्पीड ट्रेन चुंबकीय तकनीक से लैस ट्रैक पर चलती है। इसमें एलीवेटेड पर ट्रांसपेरेंट ट्यूब बिछाई जाती है, जिसके अंदर सिंगल बोगी हवा की रफ्तार से चलती है। इस ट्रेन की रफ्तार इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इसमें घर्षण बिल्कुल नहीं होता, जिसके कारण इसकी रफ्तार 700 से 800 किमी प्रति घंटे तक पहुंच जाती है। इसमें बिजली का खर्च बहुत कम होता है, जिसके कारण पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। भारत में इस तकनीक को लेकर चर्चा शुरुआती दौर में ही इसलिए अभी इसके लिए आपको इंतजार करना होगा। वर्जिन हाइपरलूप समेत कई कंपनियां हैं जो वर्तमान में इस तकनीक को विकसीत कर रही है।

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