भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष बाद भी धरती के नीचे दफन है जहरीला कचरा

Updated on 02-12-2024 12:31 PM
भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष इसी तीन दिसंबर को पूरे होने जा रहे हैं, पर गैस पीड़ितों को लेकर सरकारी वादों और जमीनी स्थिति में बहुत अंतर है। इतने वर्ष बाद भी जहरीला कचरा यूनियन कार्बाइड परिसर में दफन है। इस कारण भूजल प्रदूषित होने की बात सत्यापित हो चुकी है। वर्ष 2018 में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टाक्सिकोलाजी रिसर्च लखनऊ की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आ चुका है।

भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन

रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास की 42 बस्तियों के भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन पाया गया था, जो कैंसर और किडनी की बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके बाद इस क्षेत्र में नर्मदा जल की आपूर्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है।

आशंका है इन कालोनियों के अतिरिक्त प्रदूषित भूजल आगे पहुंच गया हो पर वर्ष 2018 के बाद जांच ही नहीं कराई गई।

गैस पीड़ित संगठन के कार्यकर्ताओं का दावा है कि रैपिड किट से उन्होंने इनके अतिरिक्त कारखाने की साढ़े तीन किमी की परिधि में आने वाली 29 अन्य कालोनियों में भी जांच की तो आर्गनो क्लोरीन मिला है, पर कितना मात्रा में है इसकी जांच बड़े स्तर पर सरकार द्वारा कराने की आवश्यकता है।

गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबाया

गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि त्रासदी के पहले परिसर में ही गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबा दिया जाता था। इसके अतिरिक्त परिसर में बनाए गए तीन छोटे तालाबों में भी पाइप लाइन के माध्यम जहरीला अपशिष्ट पहुंचाया जाता था।

इस कचरे की कोई बात ही नहीं हो रही। कारखाने में रखे कचरे को नष्ट करने के लिए 126 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे पीथमपुर में जलाया जाना है।

पुनर्वास के लिए मिली राशि में 14 वर्ष बाद खर्च नहीं हो पाए 129 करोड़ रुपये

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गैस पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2010 में 272 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें 75 प्रतिशत राशि केंद्र व 25 प्रतिशत राज्य सरकार की थी। इसमें भी 129 करोड़ रुपये आज तक खर्च नहीं हो पाए हैं।

गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग आज तक इस राशि को खर्च करने की योजना ही नहीं बना पाया है। आर्थिक पुनर्वास के लिए 104 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 18 करोड़ रुपये स्वरोजगार प्रशिक्षण पर खर्च हुए बाकी राशि बची है।

सामाजिक पुनर्वास के लिए 40 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें गैस पीड़ितों की विधवाओं के लिए पेंशन का भी प्रविधान है। 4399 महिलाओं को पेंशन मिल रही हैं। वर्ष 2011 से यह राशि एक हजार है जिसे बढ़ाया नहीं गया है। न ही किसी नए हितग्राही को शामिल किया गया है।


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