जतिन टक्कर, नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली समेत कई जगहों पर विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी समेत कई छात्र संगठन भी इस मु्द्दे को लेकर सड़क पर हैं। इस बीच तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने भी मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने की मांग की। इसके साथ ही, पार्टी ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन किया और कांग्रेस पर अपने हमले तेज कर दिए।डीएमके का कांग्रेस-टीवीके पर अटैक
जिस तरह से डीएमके ने पूरे मामले पर रिएक्ट किया उससे विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक को झटका लगता दिख रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे कि DMK की दिलचस्पी 'तीसरे मोर्चे' में बढ़ रही है। पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में DMK सांसदों की शनिवार को एक बैठक हुई, जिसमें चार प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें से एक प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके एकतरफा फैसलों की जांच कराने की मांग की गई है।डीएमके ने पारित किए 4 प्रस्ताव
एक अन्य प्रस्ताव में कांग्रेस और थलपति विजय की पार्टी TVK पर SIR को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने और 'राजनीतिक अवसरवाद' का आरोप लगाया गया है। डीएमके ने चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ युवाओं और छात्रों के आंदोलनों को भी अपना समर्थन दिया है। पार्टी ने विशेष रूप से SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ CJP के विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन किया है।
थर्ड फ्रंट को लेकर डीएमके ने तेज की तैयारी
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब DMK, कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन से बाहर एक व्यापक क्षेत्रीय मंच की संभावनाएं तलाश रही है। पार्टी नेताओं ने CJP और अन्य क्षेत्रीय दलों से संपर्क किया है; साथ ही YSR कांग्रेस पार्टी और BRS के साथ भी बातचीत की गई है। DMK सांसद कनिमोझी ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात की है।सीजेपी को स्टालिन की पार्टी ने किया सपोर्ट
बैठक के बाद कनिमोझी ने कहा कि DMK पहले ही CJP का समर्थन कर चुकी है। शुक्रवार को उनके विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का मतलब यह था कि पार्टी और उसका नेतृत्व प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है। DMK के प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि SIR जिसे बिहार, तमिलनाडु और कई अन्य राज्यों में जल्दबाजी में लागू किया गया, उसने व्यवस्थित तरीके से असली मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया। पार्टी ने चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप भी लगाया है।