मुकेश अंबानी को 500 करोड़ के निवेश पर मिलेंगे 10,000 करोड़

Updated on 14-05-2025 02:28 PM
नई दिल्ली: देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) एशियन पेंट्स में अपनी 4.9% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार कंपनी 17 साल पहले किए गए निवेश से अब बाहर निकलना चाहती है। मुकेश अंबानी की कंपनी ने यह फैसला ऐसे समय किया है जब पेंट सेक्टर मार्जिन के दबाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। भारत का पेंट बाजार 9 बिलियन डॉलर का है। इस बाजार में कई नई कंपनियां एशियन पेंट्स को नंबर 1 के स्थान से हटाने की कोशिश कर रही हैं।

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस ने इस सौदे को करने के लिए बैंक ऑफ अमेरिका (BoFA) को नियुक्त किया है। BoFA एक या कई ब्लॉक डील के माध्यम से इस लेनदेन का प्रबंधन करेगा। हालांकि ऑफर मौजूदा बाजार मूल्य से 6-7% कम पर है। पिछले 24 घंटे में कई अन्य इन्वेस्टमेंट बैंक और ब्रोकर भी खरीदारों की तलाश में शामिल हो गए हैं। मंगलवार को एशियन पेंट्स का शेयर 2,323 रुपये पर बंद हुआ था। इस कीमत पर 4.9% हिस्सेदारी बेचने पर रिलायंस को 11,141 करोड़ रुपये (1.31 बिलियन डॉलर) मिलेंगे। एशियन पेंट्स के शेयरों में बुधवार को गिरावट दिख रही है। बीएसई पर कंपनी का शेयर सुबह 9.48 बजे 1.04% गिरावट के साथ 2300.95 अंक पर ट्रेड कर रहा था।

कितना किया था निवेश

एशियन पेंट्स का शेयर पिछले साल 16 सितंबर को 3,394 रुपये के 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर था। रिलायंस ने जनवरी 2008 में 500 करोड़ रुपये में यह हिस्सेदारी खरीदी थी। यह वह समय था जब वैश्विक वित्तीय संकट आने वाला था। पिछले एक साल में स्टॉक में 19.3% की गिरावट आई है। इससे कंपनी के बाजार मूल्य में लगभग 51,000 करोड़ रुपये की कमी आई है। एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार एशियन पेंट्स की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 25 में 59% से घटकर 52% हो गई है। डिविडेंड को मिलाकर मौजूदा बाजार मूल्य पर रिलायंस को अपने निवेश पर 24 गुना रिटर्न मिलेगा।

रिलायंस ने इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर बोलियां मनचाही कीमत पर नहीं आती हैं, तो कंपनी अपनी योजना को रद्द भी कर सकती है। बाजार के जानकारों का कहना है कि रिलायंसस ने पांच साल पहले भी ऐसा ही विकल्प तलाशा था। यह उस समय था जब कंपनी भारत का सबसे बड़ा राइट्स इश्यू लॉन्च करने वाली थी। हालांकि, कंपनी ने उस योजना को आगे नहीं बढ़ाया।

पेंट बाजार का हाल

पेंट कंपनियों ने लगातार चौथी तिमाही में कमजोर राजस्व वृद्धि दर्ज की है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें ज्यादा छूट देनी पड़ रही है। कच्चे माल की लागत में कमी के बावजूद, इसका असर साल-दर-साल सकल मार्जिन में कमी के रूप में दिख रहा है। एशियन पेंट्स की डेकोरेटिव पेंट्स में 44% बाजार हिस्सेदारी है। यह एशिया में दूसरी सबसे बड़ी और विश्व स्तर पर आठवीं सबसे बड़ी कंपनी है। कंपनी की वार्षिक घरेलू डेकोरेटिव पेंट क्षमता 1.85 मिलियन किलो लीटर है। यह 60 से अधिक देशों में उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान करती है।

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